16 परिवारों को नहीं मिले अभी तक भूखंड

नई टिहरी। टिहरी बांध विस्थापित असेना के अनुसूचित जाति के 16 परिवारों को वर्ष 2002 से आवासीय भूखंड नहीं मिल पाए हैं। वर्षों तक पुनर्वास निदेशालय के चक्कर काटने के बाद ग्रामीण थकहार कर ग्रेवासं सेल में गए, लेकिन वहां भी सुनवाई नहीं हुई।
टिहरी बांध का रॉकफिल डैम बनाने के लिए असेना में खनन पट्टा दिया गया था, तब गांव के लोगों को विस्थापित किया गया। उसमें गांव के 16 परिवार वह भी हैं, जिन्हें अभी तक आवासीय भूखंड नहीं मिल पाया है। विस्थापित कालू, चैतू और जीत लाल ने बताया कि 2002 में गांव का विस्थापन किया गया था, जिसमें कृषि भूखंड के बदले 5-5 लाख रुपये दिए गए और आवासीय भूखंड आवंटन के लिए 19,600 रुपये जमा कराए गए थे। पुनर्वास निदेशालय के कई चक्कर काटने के बाद भी भूखंड नहीं मिला तो टिहरी बांध पीड़ित शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन यहां भी तारीक के सिवा कुछ नहीं मिल पा रहा है।

इंसेट
असेना के 16 परिवारों का मामला शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में गतिमान है। वहां से निर्णय आने के बाद ही पुनर्वास निदेशालय से आवंटन की कार्रवाई की जा सकती है। – राकेश कुमार तिवारी, प्रभारी अधिकारी पुनर्वास।।
तिवाड़गांव का सर्वे कराएं
नई टिहरी। टिहरी बांध की झील के कारण भू-धंसाव की समस्या से जूझ रहे तिवाड़गांव-मरोड़ा के ग्रामीणों ने गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भू-धंसाव के कारण गांव के छह-सात परिवार खतरे की जद में हैं, जिन्हें विस्थापित किया जाना चाहिए। डीएम को दिए ज्ञापन में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष सूरज कंसवाल ने बताया कि गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण नहीं कराया गया तो कलक्ट्रेट परिसर में धरना शुरू किया जाएगा। उन्होंने जाख-डोबरा मोटर मार्ग पर किए जा रहे घटिया डामरीकरण की जांच की मांग भी की है। ज्ञापन भेजने वालों में सुनील डोभाल, सच्चिदानंद कंसवाल, अरविंद डोभाल और नितिन कंसवाल आदि शामिल थे।

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